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चित्रगुप्त पूजा विधि - Page 1/4

चित्रगुप्त पूजा हेतु पूजन सामग्री

∗ श्री चित्रगुप्त जी की तस्वीर
∗ चंदन
∗ रौली
∗ मौली
∗ धूप
∗ रूई
∗ पान
∗ सुपारी
∗ अबीर
∗ पीली सरसों
∗ गंगाजल
∗ चावल (पीले रंग का)
∗ तिल
∗ जौ
∗ दूध
∗ दही
∗ शहद
∗ शक्कर
∗ अदरक
∗ घी
∗ ताम्बे या कांसे का कटोरा
∗ जनेऊ (यज्ञोपवीत )
∗ मिट्टी का पात्र
∗ दोने
∗ कपूर
∗ ऋतुफल
∗ पंचपात्र
∗ कलम
∗ दवात
∗ स्याही
∗ माला
∗ फूल
∗ वस्त्र लाल -2, पीला-1
∗ चौकी
∗ लकड़ी का पाटा
∗ आसन
∗ नैवैद्य
∗ चम्मच
∗ अर्घा
∗ माचिस
∗ तुलसी पत्ता
∗ कलश
∗ लोटा
∗ दूब
∗ दीप
∗ आम का पत्ता
∗ लौंग
∗ इलाइची
∗ सादे कागज
∗ मिट्टी का कटोरी-2

चित्रगुप्त पूजा हेतु हवन सामग्री

∗ हवन कुण्ड
∗ घी
∗ तिल
∗ चावल
∗ जौ
∗ हवन सामग्री का पैकेट
∗ आम की लकड़ी

पूजा की तैयारी

पूजा के स्थान को शुद्ध कर लें । पूजा करने के लिये उपस्थित सभी साधक स्नान कर शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र पहन लें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछायें और उस पर चित्रगुप्त भगवान की तस्वीर या मुर्ति स्थापित करें। गणेश जी की मूर्ति अथवा तस्वीर रखें। यदि गणेश जी की मूर्ति अथवा तस्वीर ना हो तो सुपारी पर मौली बांध कर गणेश जी बनाकर चौकी पर स्थापित करें। कलश में शुद्ध जल भर लें। आम के पत्तों को धो लें । सभी फल को धो लें। दूध, दही, घी, शहद तथा शक्कर का रस मिलाकर पंचामृत तैयार कर लें। अदरक का रस तथा गुड़ मिलाकर प्रसाद बनायें। पंचपात्र में जल भर कर रख लें और उसमें थोड़ा गंगाजल मिला दें। मिट्टी के एक कटोरे में शक्कर भर कर रखें ।



श्री चित्रगुप्त पूजन विधि

साधक सभी बंधु-बांधवों के साथ आसन पर पूर्वाभिमुख होकर बैठ जायें।
पवित्रीकरण
पंच-पात्र में से फूल अथवा चम्मच से जल लेकर दाएं हाथ की अंगुलियों से पूजा की सारी सामग्री व बंधु-बांधवों पर जल छिड़कते हुए पवित्र होने का मंत्र का उच्चारण कर उपस्थित बंधु-बांधवों के साथ अपने आप को पवित्र कर लें।
पवित्र होने का मंत्र
ॐ अपावित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्याभ्यन्तर: शुचिः॥
मुख शुद्धि
पुष्प या चम्मच से तीन बार दाएँ हाथ में जल ले कर मुख शुद्धि करें ।
अब “ॐ केशवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर “ॐ नारायणाय नमः” 'मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
अब “ॐ वासुदेवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर “ॐ हृषिकेशाय नमः” कहते हुए दाएँ हाथ के अंगूठे के से होंठों को दो बार पोंछकर हाथों को धो लें।